कहीं सेक्स से जुड़ी गलतफहमियां आपको भी तो नहीं कर रही हैं परेशान?
तमाम रिसर्च से पता चला है कि हम अक्सर ये सोचते हैं कि युवा ज्यादा सेक्स करते हैं। हमारी ये सोच हकीकत से परे है। यही हाल महिलाओं की सेक्स लाइफ को लेकर मर्दों की सोच का है। एक रिसर्च के तहत जब ब्रिटेन और अमरीका के लोगों से एक सवाल किया गया। उनसे ये पूछा गया कि उन्हें क्या लगता है कि उनके देश में 18-29 साल की उम्र के लोगों ने पिछले चार हफ्तों में कितनी बार सेक्स किया होगा?
इस सवाल के जवाब में लोगों के औसत अनुमान ये थे कि दोनों ही देशों में इस उम्र के लोगों ने एक महीने में 14 बार सेक्स किया होगा। लेकिन हकीकत ये है कि ब्रिटेन में 18-29 साल के युवाओं ने एक महीने में केवल पांच बार और अमरीकी युवाओं ने महीने में चार बार सेक्स किया था। ये बात यौन बर्ताव पर हुए एक व्यापक सर्वे से सामने आई है। ब्रिटेन और अमरीका के लोगों के अनुमान का मतलब ये था कि उनके देश के युवा हर दूसरे दिन यौन संबंध बना रहे थे। यानी वो साल में 180 बार सेक्स कर रहे थे जबकि सच्चाई ये है कि ब्रिटेन और अमरीका के युवा साल में औसतन 50 बार ही सेक्स करते हैं।
युवतियों के सेक्स को लेकर भी गलतफहमी
हमारे अंदाज़ा लगाने की ये गलती बड़ी है। मगर, ये गलतफहमी की सबसे बड़ी मिसाल नहीं है। ब्रिटेन और अमरीका के मर्द अपने देश की युवतियों की सेक्स लाइफ़ को लेकर और भी गलतफहमियां पाले हुए हैं। ब्रिटेन के मर्द सोचते हैं कि उनके देश की युवतियों की सेक्स लाइफ बेहद शानदार है। वो महीने में औसतन 22 बार यौन संबंध बनाती हैं।
वहीं अमरीकी पुरुष सोचते हैं कि उनके देश की युवतियां महीने में 23 बार सेक्स करती हैं। इस अंदाज़े का मतलब ये हुआ कि औसत अमरीकी या ब्रिटिश युवती हफ्ते में हर कामकाजी दिन सेक्स करती है। इसके अलावा वो महीने में दो या तीन बार किसी खास मौके पर भी सेक्स करती है। सच तो ये है कि औसत अमरीकी या ब्रिटिश युवतियां महीने में पांच बार ही सेक्स करती हैं।
तो, गलतफहमियों की इतनी भरमार की वजह क्या है? इसकी वजह हमारे खयालात भी हैं और जो हमें बताया जाता है, वो भी है। इंसान की नस्ल की बुनियाद सेक्स है। हमारा अस्तित्व सेक्स पर ही टिका हुआ है। लेकिन सेक्स को लेकर दुनियाभर के लोग तमाम गलतफहमियां पाले हुए हैं। हम इंसान के दूसरे सामाजिक बर्ताव को देखकर उसका ठीक-ठाक अंदाजा लगा सकते हैं पर सेक्स के साथ दिक्कत ये है कि आमतौर पर लोग ये काम पर्दे में करते हैं।
तो जब हमारे पास सेक्स से जुड़ा हुई असल जानकारी नहीं होती तो हम 'आधिकारिक सूत्रों' के सहारे हो जाते हैं और सेक्स को लेकर ये 'आधिकारिक सूत्र होते हैं, खेल के मैदान या लॉकर रूम में होने वाली गप-शप, तमाम अधकचरे सर्वे, मीडिया में रस लेकर छापी जाने वाली खबरें और पोर्न।' इन सभी 'आधिकारिक सूत्रों' से सेक्स के बारे में मिली अधकचरी जानकारी को हम हकीकत मान बैठते हैं।
इसी सर्वे के तहत हमने तीन देशों के लोगों से ये अंदाजा लगाने को कहा कि उनके देश के लोग 45-54 साल की उम्र के दौरान कितने सेक्स पार्टनर बनाते होंगे। इस मामले में लोगों के अंदाजे काफी सटीक निकले। ऑस्ट्रेलिया और ब्रिटेन में 45-54 साल की उम्र तक पहुंचते-पहुंचते पुरुष 17 सेक्स पार्टनर बना लेते हैं। अमरीका में ये आंकड़ा 19 है। इस बारे में जो अंदाजे लगाए गए, वो सटीक थे।
बात मजेदार तब हो जाती है, जब लोग पुरुषों और महिलाओं में तुलना करते हैं। महिलाओं ने सर्वे में यौन साथी का जो आंकड़ा बताया वो मर्दों के मुकाबले बहुत कम था। महिलाओं के दावे के मुताबिक, वो मर्दों के मुकाबले आधे ही सेक्स पार्टनर बनाती हैं। ऊंचे दर्जे के सेक्स सर्वे में भी ये दुविधा सामने आती रही है लेकिन ये बात सच होना नामुमकिन है। अब चूंकि औरत और मर्द, दोनों ही सेक्स पार्टनर बनाते हैं और दोनों की आबादी कमोबेश एक बराबर है, तो ये कैसे हो सकता है कि मर्द ज्यादा सेक्स पार्टनर बनाते हैं और महिलाएं कम। ये संख्या तो बराबर के आस-पास होनी चाहिए। आख़िर मर्द, औरतों को ही तो सेक्स पार्टनर बनाते हैं।
इस फर्क की कई वजहें बताई जाती हैं। एक तो पुरुषों का सेक्स के लिए कॉलगर्ल के पास जाना है। वहीं, कई ऐसे यौन बर्ताव भी होते हैं, जिन्हें औरतें सेक्स नहीं मानतीं, मगर पुरुष मानते हैं। इसकी एक वजह ये भी मानी जाती है कि पुरुष अपने आप को मैचो बताने के लिए सेक्स पार्टनर की संख्या बढ़ा-चढ़ाकर भी बताते हैं। अमरीका में तो सेक्स को लेकर औरतों और मर्दों के अनुमान में एक और ट्विस्ट है। औसत अमरीकी मर्द ये मानते हैं कि अमरीकी युवतियों के औसतन 27 सेक्स पार्टनर होते हैं। वहीं अमरीकी औरतें, अपने देश के मर्दों के बारे में ये सोचती हैं कि उनके 13 सेक्स पार्टनर हो जाते हैं। महिलाओं के अंदाजे सच के करीब हैं।
औसत अमरीकी मर्द के 12 सेक्स पार्टनर बनते हैं। औसत अमरीकी मर्द की इस बेतुकी सोच की वजह उनके बीच के कुछ ऐसे पुरुष हैं, जो ये सोचते हैं कि अमरीकी महिलाओं के बहुत सारे यौन साथी होते हैं। 1000 लोगों के हमारे सैंपल में 20 अमरीकी पुरुष ऐसे थे, जो ये सोचते थे कि उनके देश की महिलाओं के औसतन 50 सेक्स पार्टनर होते हैं। हमारी ये गलतफहमियां बताती हैं कि हम दुनिया को किस नजर से देखते हैं। ये हमारे पूर्वाग्रहों की पोल खोलते हैं। तमाम सर्वे बताते हैं कि युवाओं और महिलाओं की सेक्स लाइफ को लेकर लोगों ने कितनी खामखयाली पाली हुई है। हालांकि, ये सोच रखने वाले मर्दों का तबका बहुत छोटा-सा है, मगर ये बाकियों की सोच पर भी असर डालता है।
गलतफहमियां दूर करने का एक ही तरीका है। लोगों को ज्यादा से ज्यादा जानकारी दी जाए, ताकि वो अपने खयालात सुधार सकें। ताकि, वो गलत सोच की वजह समझ सकें। खुशफहमी या गलतफहमी पालने वाले लोगों को ये पता चल सके कि उन्हें जो बताया जाता है। फिर उसके आधार पर वो जो सोचते हैं, वो कितना गलत हो सकता है।
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