पीरियड्स को लेकर हैं वहम तो दूर कर लें माहवारी से जुड़ी गलतफहमियां
पीरियड्स को लेकर हैं वहम तो दूर कर लें माहवारी से जुड़ी गलतफहमियां
आमतौर पर माहवारी (पीरियड्स) के दौरान महिलाओं में सिर दर्द, मूड स्विंग्स जैसे कई लक्षण देखने को मिलते हैं। जिसका सीधा असर महिलाओं की सेहत पर भी पड़ने लगता है। अधिकत्तर महिलाएं इस दौरान अपनी परेशानियों को डॉक्टर या दूसरी महिलाओं से शेयर करने से कतराती हैं। जिसकी वजह से वो पीरियड्स से जुड़े कई ऐसे भ्रम पाल लेती हैं जिसका बुरा असर उनकी सेहत पर पड़ने लगता है।
लड़कियों की हर छोटी बड़ी परेशानियों को फोकस में रखकर आइए जानते हैं आखिर कौन से हैं वो 3 भ्रम जिनकी वजह से महिलाओं की सेहत को हो सकता है नुकसान.
1) 28 दिनों में पीरियड्स नहीं आए तो समझो दिक्कत है
लड़कियों को अक्सर यह भ्रम रहता है कि अगर उन्हें हर 28 दिन में महावरी नहीं होती है तो कुछ गड़बड़ हो गई है। लेकिन हकीकत में ऐसा बिल्कुल नहीं है। पीरियड्स के बीच के नियमित और स्वस्थ अंतराल का समय वयस्कों में 21 से 37 दिन और किशोरों में 21 से 45 दिन तक होता है। इस अवधि को पीरियड्स के पहले दिन से लेकर आपके अगले पीरियड शुरु होने तक के बीच का समय माना जाता है। यदि आपको 28 दिन की जगह 35 दिन बाद पीरियड्स होते हैं तो घबराने की जरूरत नहीं है। ऐसा तनाव, आहार में बदलाव, हार्मोनल परिवर्तन और पर्यावरण की वजह से भी हो सकता है। हां अगर यह समय सीमा 37 दिनों से बढ़कर अधिक हो जाती है, तो आपको अपने डॉक्टर से परामर्श कर लेना चाहिए।
2) पीरियड्स में शरीर से निकलता है गंदा खून
अक्सर महिलाओं के बीच यह भ्रम बना रहता है कि पीरियड्स के दौरान शरीर से निकलने वाला खून गंदा होता है। आपको बता दें, इस तथ्य में बिल्कुल भी सच्चाई नहीं है। इस दौरान शरीर से निकलने वाला रक्त शरीर में मौजूद सामान्य रक्त की ही तरह होता है बस इसमें साधारण रक्त की तुलना में कम रक्त कोशिकाएं होती हैं।
3) पीरियड्स के दौरान गर्भ नहीं ठहरता-
अक्सर महिलाओं को कहते सुना जाता है कि पीरियड्स के दौरान सबंध बनाने से गर्भ ठहरने का खतरा न के बराबर होता है। लेकिन आपको बता दें, महिलाओं के मासिक धर्म चक्र के बीच में ओव्यूलेशन की वजह से गर्भवती होने की संभावनाएं बनी रहती हैं।

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